उदयपुर. प्रदेश की सियासत में दाे दिन से चल रहे महाभारत में मेवाड़ और यहां के जनप्रतिनिधि भी अहम भूमिका में रहे। बात चाहे कांग्रेस में गहलाेत और पायलट के खेमाें की रही हाे या फिर विपक्ष भाजपा की, दाेनाें में ही मेवाड़ का खास राेल रहा है। इतना ही नहीं बीटीपी के दाे विधायकाें और एक निर्दलीय विधायक काे लेकर भी कई तरह से सियासी उलटफेर नजर आए।
पिछले विधानसभा चुनाव में मेवाड़ की 28 सीटाें में कांग्रेस ने 10,भाजपा ने 15 सीटें जीती थी जबकि 2 सीटेें बीटीपी ने और 1 पर निर्दलीय ने जीत हासील की थी। हाल ही में हुए राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस के सभी विधायकों के साथ ही बीटीपी के 2 और 1 निर्दलीय ने भी कांग्रेस का साथ दिया था।
माैजूदा संकट के दाैर में वल्लभनगर से कांग्रेसी विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत काे छाेड़ मेवाड़ के सभी कांग्रेसी विधायकाें के साथ ही निर्दलीय विधायक रमिला खड़िया सरकार के साथ खड़ी नजर आई हैं। वहीं कांग्रेस की इस अंदरूनी बगावती राजनीति के बीच मेवाड़ के सबसे कद्दावर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और नाथद्वारा से कांग्रेस की टिकट पर जीते और माैजूदा विधानसभाध्यक्ष डाॅ. सीपी जाेशाी की भूमिका भी अहम हाे गई है।
बीटीपी ने तटस्थ रहने का किया एलान, लेकिन सरकार शर्तें माने ताे दे सकते हैं समर्थन
मेवाड़ में बीटीपी के सागवाड़ा से रामप्रसाद डिंडाेर और चाैरासी से राजकुमार राैत विधायक हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने फ्लाेर टेस्क की स्थिति में अपने दाेनाें विधायकाें काे न कांग्रेस और न ही भाजपा काे वाेट देने के लिए व्हीप जारी किया है।
प्रदेशाध्यक्ष डाॅॅ.वेलाराम घाेघरा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस काे मुद्दा आधारित वाेट दिया था। प्रमुख मांग थी कि टीएसपी एरिया में महाराष्ट्र पैटर्न लागू हाे। अभी बीटीपी कांग्रेस की गुटबाजी में नहीं पड़ेगी, लेकिन हमारे मुद्दे जाे सरकार के सामने रखे हुए हैं उनकाे क्रियान्वित किया जाता है ताे हम सरकार के साथ हाेंगे।
गुलाबचंद कटारिया : नेता प्रतिपक्ष
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाते इनकी भूमिका सबसे अहम है। भाजपा में ये पूरा सियासी घटनाक्रम केंद्रीय नेतृत्व की ओर से माॅनिटर किया जा रहा है लेकिन प्रदेश में फ्लाेर टेस्ट या आगे की काेई भी रणनीति का क्रियान्वयन इन्हीं के माध्यम से किया जाएगा। गहलाेत की ओर से हालही में भाजपा और उन पर सरकार गिराने का षड्यंत्र रचने का आराेप लगाने के बाद इन्हाेंने गहलाेत काे ललकारते था। साेमवार दाेपहर काे उदयपुर से जयपुर रवाना हाे गए।
सीपी जाेशी : विधानसभा अध्यक्ष
कभी खुद भी सीएम के दावेदार थे। केंद्र में कांग्रेस शासनकाल में सत्ता और संगठन में शीर्ष पदाें पर रहे। नाथद्वारा विधायक जाेशी अभी विधानसभा अध्यक्ष हैं, फिलहाल के घटनाक्रम में इनका सीधा हस्तक्षेप ताे नहीं है लेकिन सरकार के फ्लाेर टेस्ट के वक्त इनकी भूमिका निर्णायक रह सकती है। सीएम गहलाेत के बेटे वैभव के आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद से ताे गहलाेत और सीपी के संबंध और मजबूत हुए हैं।
गजेंद्र सिंह शक्तावत : एमएलए, वल्लभनगर
कद्दावत नेता गुलाबसिंह शक्तावत का कांग्रेस में खासा दबदबा रहा है। गहलाेत सरकार में वे गृहमंत्री रहे। उनके निधन के बाद भी कांग्रेस का शक्तावत परिवार पर भराेसा बना रहा। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तीन बार इनके बेटे गजेंद्र सिंह शक्तावत काे टिकट दिया। वे दूसरी बार वल्लभनगर से विधायक बने हैं। वे साेमवार काे कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे। इनका माेबाइल भी स्वीच ऑफ है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि वे पायलट के समर्थन में हैं।
रघुवीर मीणा : पूर्व सांसद, सीडब्ल्यूसी मेंबर
मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत के करीबी और विश्वपात्र नेताओं में गिने जाते हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद काे लेकर गहलाेत खेमे की ओर से इनका नाम चलाया गया। मेवाड़ के कांग्रेस विधायकाें काे अशाेक गहलाेत के पक्ष में रखने में इनकी अहम भूमिका रही। सीएम निवास पर गहलाेत खेमे के प्रमुख रणनीतिकाराें में से एक रहे हैं। मीणा हालही में भाजपा के अर्जुन मीणा के सामने लाेकसभा हार चुके हैं।
रमीला खड़िया : निर्दलीय विधायक, राज्यसभा चुनावाें में वाेटिंग काे लेकर लेनदेन से जुड़े प्रकरण काे लेकर इनका नाम चला था। विधायक दल की बैठक में ये शामिल हुई हैं। इन्हाेंने गहलाेत सरकार के साथ हाेने की बात कही है।
महेंद्रजीत मालवीया : कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री मालवीया को इस बार मंत्री नहीं बनाने से उनकी गहलाेत से दूरिया बढ़ी थीं, लेकिन विधायकाें की खरीद फराेख्त मामले में सुर्खियों में आए मालवीया ने अभी गहलाेत सरकार में पूर्ण विश्वास जताना तय किया है।
दयाराम परमार : कांग्रेस विधायक और पूर्ववर्ती गहलाेत सरकार में मंत्री रहे चुके आदिवासी नेता ने इस बार भी गहलाेत खेमे में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।



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